सब कहते हैँ कि,
आज हम स्वतंत्र हैँ !
ये आजादी तो मात्र,
उनकी है जो खेलते प्रपंच हैँ !!
आजादी के लिए जिन्होनेँ,
दी कुर्बानियाँ !
वास्तव मेँ वो तो रह गये,
बनकर कहानियाँ !!
स्वतंत्रता, गणतंत्र दिवस पर,
ध्वज फहराया जाता है !
अपनी काली करतुतोँ से,
इसको धुल चटाया जाता है !!
स्विस बैँकोँ मेँ भरकर धन,
ये स्वर्ग ले कर जायेँगे !
खाने को मिले जो इनको,
तोप से चारा तक खा जायेँगे !!
कवि "साहस" का है अनुमान,
होगा जनविद्रोह घमासान !
अंत मे छुपकर कहाँ जायेँगे,
गरिबोँ के हाथोँ निर्वाण पायेँगे !!
जिस तरह की बयार,
विश्व मेँ चल रही !
क्या बिना छुये,
देश को निकल जाएगी !!
पुजनियोँ! अब तो सम्हल जाओ,
आजाद हो चुके हैँ हम !
हमेँ आजादी पाने को,
मजबूर न कराओ !!
आज हम स्वतंत्र हैँ !
ये आजादी तो मात्र,
उनकी है जो खेलते प्रपंच हैँ !!
आजादी के लिए जिन्होनेँ,
दी कुर्बानियाँ !
वास्तव मेँ वो तो रह गये,
बनकर कहानियाँ !!
स्वतंत्रता, गणतंत्र दिवस पर,
ध्वज फहराया जाता है !
अपनी काली करतुतोँ से,
इसको धुल चटाया जाता है !!
स्विस बैँकोँ मेँ भरकर धन,
ये स्वर्ग ले कर जायेँगे !
खाने को मिले जो इनको,
तोप से चारा तक खा जायेँगे !!
कवि "साहस" का है अनुमान,
होगा जनविद्रोह घमासान !
अंत मे छुपकर कहाँ जायेँगे,
गरिबोँ के हाथोँ निर्वाण पायेँगे !!
जिस तरह की बयार,
विश्व मेँ चल रही !
क्या बिना छुये,
देश को निकल जाएगी !!
पुजनियोँ! अब तो सम्हल जाओ,
आजाद हो चुके हैँ हम !
हमेँ आजादी पाने को,
मजबूर न कराओ !!
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