आज सुबह मेरे भाई ने अखबार से नजर हटाकर मुझसे पुछा "क्या भ्रष्टाचार खत्म हो जायेगा?" मैने पुछा पहले यह बताओ कि लोकपाल विधेयक के बारे मेँ क्या जानते हो ? छोटे ने तपाक से कहा "कुछ खिलाओ तो बताता हुँ" मैने कहा....शायद इस जन्म मेँ यह खत्म न हो सकेगा । "क्युँ" भाई ने कहा मैने समझाया ...तुमने तो शुरुआत कर दी है। उसने कहा.."आप तो घर के हैँ । ये तो दुसरी बात है। "चोर चोरी की शुरुआत अपने घर से करता है" मेरे इस कथन से माहौल खामोश सा हो गया । शायद खामोशी मेँ छोटे भाई को उत्तर मिल गया था।
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